अभी और भी भयंकर होने वाला है !, पं.अभिषेक जोशी की भविष्यवाणी

ज्योतिर्विद पं.अभिषेक जोशी की भविष्यवाणी

भारतीय उपमहाद्वीप के भूकंप का इतिहास है भारतीय प्लेट एशिया के भीतर 49 मिलीमीटर प्रतिवर्ष खिसकने के कारण उच्च आवृत्ति और तीव्रता के भूकंप आते हैं करीब करीब 50 भूकम्पो का अध्ययन करने के बाद ज्योतिषी आधार पर हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि अधिकांश भूकंप पूर्णिमा या अमावस्या के आसपास ही आते हैं और इसमें भी अधिग्रहण हो तो उसका प्रभाव और अधिक हो जाता है अभी तक भूकंप तरंगों का रिएक्टर स्केल 1 से 9 तक के पैमाने पर ही मापा गया है यद्यपि नो कोई अंतिम बिंदु नहीं है परंतु आज तक इससे ऊपर का भूकंप नहीं आया है रिक्टर पैमाने को 1935 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में कार्यरत वैज्ञानिक चार्ल्स रिएक्टर ने बेनो गुटेनबर्ग के सहयोग से खोजा था इसके अंतर्गत प्रति स्केल भूकंप की तीव्रता 10 गुना बढ़ जाती है भूकंप के दौरान जो ऊर्जा निकलती है वह स्केल 32 गुना बढ़ जाती है भूकंप की तीव्रता का अंदाजा उसके केंद्र से दूर हुए लोगों पर लगाया जाता है भूकंप से बाहर निकलने वाली ऊर्जा के काफी करीब होती है जो तबाही बढ़ा देती है।

वही जो भूकंप गहरे होते हैं वह जमीन को ज्यादा नहीं लाते जिससे मानव जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है भारत को मोटे तौर पर भूकंप के खतरे के हिसाब से चार हिस्सों में बांटा गया है  जोन 2,   जोन 3,  जोन4, तथा जोन 5। सबसे कम खतरे वाला जोन 2है तथा सबसे ज्यादा खतरे वाला जोन 5 है उत्तर पूर्व जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्से जोन 5 में आते हैं उत्तराखंड के कम ऊंचाई  वाले हिस्सो से लेकर उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्से व दिल्ली जोन 4 में तथा मध्य भारत के कुछ हिस्से जोन 3 में आते हैं जिसमें नर्मदा का बेल्ट सम्मिलित है और दक्षिण भारत के ज्यादातर हिस्से सीमित खतरे वाले जोन दो में आते है।

भारतीय ज्योति वैज्ञानिकों के अनुसार भूकंप आमतौर पर पूर्णिमा और अमावस्या के आसपास ही आते हैं उस समय हताहतों की संख्या अधिक होती है सूर्य के दक्षिणायण में होने पर दिसंबर में तथा उत्तरायण में मई का महीना अन्य महीनों के अपेक्षा अधिक खतरनाक माना गया है विगत 35 वर्षों में आए भूकंप परिस्थिति पर आधारित अध्ययन के अनुसार बीसवीं शताब्दी में विश्व भर में आए भूकंप में लगभग 18 लाख मारे गए इनमें से 14 लाख भीषण भूकंप के कारण और शेष हल्के भूकंप में हताहत हुए एक महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आया 21 जून से 21 दिसंबर तक दक्षिण के हताहत होने वालों की संख्या अधिक रही जबकि 21 दिसंबर से 21 जून के दौरान मृतको की संख्या कम रही । जबकि अप्रैल और नवंबर के महीने में हताहत होने वालों की संख्या न के बराबर थी।

ज्योतिष के अनुसार 15 बड़े भूकंप में बुध सूर्य के अंश से अधिक आगे था इतना ही नहीं कई भूकंप में यह देखने में आया है कि क्रूर ग्रह मंगल शनी का परस्पर दृष्टि संबंध राहु मंगल का दृष्टि संबंध या युति अथवा उनका योग भी बड़े भूकंप का कारण बना है इस वर्ष 21 जून2020 आषाढ़ कृष्ण अमावस्या को होने वाला  कंकणाकृति सूर्य ग्रहण जहां एक और कंधार कश्मीर इन के लिए कष्टकारी रहेगा वही चीन जापान इंडोनेशिया और पाकिस्तान के विशेष भाग में प्राकृतिक आपदा से जन-धन हानि का योग भी बनेगा ग्रहण से पूर्व 16 जून को मंगल मीन राशि में प्रवेश कर जाएगा और शनि से दृष्ट रहेगा उससे पहले मंगल पर राहु की दृष्टि बनी हुई है तथा बुध सूर्य के अंश से आगे चल ही रहा है अतः अभी से ही शासन को इस और सावधानी भी रखना चाहिए कि किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा जल प्लावन आदि के लिए भी तैयार रहें क्योंकि वर्तमान स्थिति के अनुसार दक्षिण पश्चिम भूभाग पर प्राकृतिक प्रकोप से प्रभावित होने के असर  ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। ग्रहण काल के बाद आगामी 90 दिनों के अंदर भारत पाक व चीन सीमा पर सैन्य गतिविधियां भी तेज होगी । आगामी 24 मई से 4 जून 2020 तक मङ्गल व राहु का परस्पर नक्षत्र परिवर्तन भी किसी बड़ी घटना का संकेत देते हुए मुस्लिम राष्ट्र के सत्ता हस्तांतरण की ओर भी संकेत कर रही है।


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