कभी कलम तो कभी कुल्हाड़ी ,रचनाकर रूकता नहीं

करन निम्बार्क, मुंबई

कैसे एक साधारण सा दिखनेवाला पतला-दुबला युवक लॉकडाउन में भी बना लाखों युवाओं की प्रेरणा ! कहते हैं कि हर मनुष्य को हालातों और परिस्थितियों के अनुरूप ढलना चाहिए और साथ ही जीवन में हर मोड़ पर परिश्रम करते रहना चाहिए । स्वयं परिश्रम करके युवाओं को परिश्रम का संदेश देने वाले श्री दिनेश्वर माली अन्य लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गए हैं । वे स्वयं आज वर्तमान परिस्थिति में मनरेगा में परिश्रम करके एक प्रेरणा का संदेश युवाओं को दे रहे हैं ।
कवि और उदघोषक दिनेश्वर माली, रोहिड़ा, ने बताया कि जीवन में कर्म सदैव करते रहना चाहिए । आज के दौर में युवा स्कूल-कॉलेज की डिग्री-डिप्लोमा या बड़ी-बड़ी उपलब्धियाँ हासिल करने पर परिश्रम से मुँह मोड़ने लगता है एवं मेहनत करने में शर्म या संकोच करता है । अतः वे स्वयं परिश्रम करके यह संदेश देना चाहते हैं कि युवा कभी भी परिश्रम से मुँह ना मोडे और जीवन की परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढाले ।
कैसे कठिनाई को भी एक अवसर बनाया माली जी ने ! लॉकडाउन में जब सभी लोग घरों में थे । कोई गृहकार्य, कोई रसोई, कोई चित्रकला और अपनी-अपनी रुचि के काम कर रहा था तो कवि और लेखक ने कलम उठाई और समाज, व्यापार, परम्परा, रीतिरिवाज से जुड़ी कहानियों की एक नयी किताब लिख डाली और पहला लॉकडाउन 21 दिनों का था इसलिए नाम दिया "21 दिन-21 कहानियाँ" ।
युवाओं को परिश्रम के लिए प्रेरित करने वाले एक कर्मयोगी युवा, लेखक, कवि, गीतकार श्री दिनेश्वर माली एक  साधारण किसान परिवार में रोहिड़ा गाँव में जन्मे । छोटे से गाँव में जन्म लेकर मुंबई से देशभर में मंच संचालक की पहचान बनाई । अब तक कविता, गीत, गजल, भजन की 12 किताबें प्रकाशित की और राजस्थान के इतिहास की पहली और सबसे बड़ी राजस्थानी कलाकार डायरेक्टरी भी प्रकाशित की है । काव्य-साहित्य में कई उल्लेखनीय काम और उपलब्धियों को हासिल करने वाले इस कर्मयोगी कलमकार को किसान कवि, राजस्थान गौरव रत्न जैसी उपाधियों से सम्मानित भी किया जा चुका है । वे कहते हैं कि जीवन मे कोई भी काम छोटा या बड़ा नही होता। श्री माली जैसी शख्सियत को मेहनत करता देख लॉकडाउन में बिलकुल खाली बैठे युवा भी परिश्रम, मेहनत करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं ।
मीडिया वाले एवं चारों ओर एक ही शोर है - लोग घरों में बंद है, काम-काज ठप्प है, आदि-आदि !
आज जो संकट समस्त विश्व में छाया हुआ है, लोग अपने-अपने घरों में बंद हैं, काम-काज बंद हैं । जीवन मानो थम सा गया है । हजारों मजदूर और मजबूर लोग सड़कों पर अपने पैतृक गाँव को लौटते हुए देखे जा सकते हैं । मजदूर तो आपको सोशल मीडिया और टीवी पर दिख जाएँगे पर एक और वर्ग है जो मजबूर है इस संकट में, वह आपको कोई नहीं दिखाएगा । वह वर्ग है मनोरंजन जगत में, साहित्य जगत में, लेखन से जुड़े कलाकारों का । काम तो उनका भी बंद है । घरों में तो वो भी हैं । अपने घर तो वो भी जाना चाहते हैं । लेकिन उनके बारे में कोई नहीं लिखता । क्या उन्हें भूख प्यास नहीं सताती ? क्या उन्हें अपनों की याद नहीं आती ? श्री दिनेश्वर माली भी ऐसे ही जगत से आते हैं और इस संकट को देखते हुए उन्होंने अपने पैतृक गाँव जाना ही उचित समझा । पर वहाँ जाकर भी कर्मवीर घर पर बैठा नहीं, राजस्थान की कड़ी धूप में भी पत्रकारिता का कर्तव्य निभाने निकल पड़ा है । समय विकट है तो कर्म से मुँह न मोड़कर श्रम करने के लिए भी तत्पर खड़ा है । जिस उद्घोषक को बड़े-बड़े समारोह में मंच की शोभा बढ़ाते देखा, कभी कविता पाठ करते तो गाते देखा, आज अपने गाँव में वे कुल्हाड़ी-कुदाल लेकर खेतों, खलिहानों में, मनरेगा में बेझिझक पसीना बहाते देखे जा सकते हैं, क्योंकि, श्रम ही राम है । और उनकी इस नई भूमिका के आगे बड़े-बड़े कलाकार नतमस्तक हैं । युवाओं ही नहीं अपितु प्रत्येक प्राणी की प्रेरणा है श्री दिनेश्वर माली ।

Youtube Channel: https://tinyurl.com/ydddvllg
Whatsapp Group: https://chat.whatsapp.com/ClaOhgDw5laFLh5mzxjcUH

Post a Comment

0 Comments