सरकार ठीक मंशा से नही कर रही शराब घोटाले की जाँच :तरविंदर सैनी

शराब घोटाले की जाँच को आँच - तरविंदर सैनी

एस.ई.टी. में शामिल ए.डी.जी.पी. श्री सुभाष यादव जी के सेवानिवृति के आदेशों के निकाले जाने के पीछे जाँच को प्रभावित करने का कोई प्रयास तो नहीं ?

श्री टी.सी.गुप्ता जी के निर्देशन में एस.ई.टी. का गठन हुआ , टीम को 31मई तक का समय दिया गया था विस्तृत रिपोर्ट देने और दोषियों पर कार्यवाही करने के लिए , उस समयावधि में कार्य पूरा करने के आदेश थे परन्तु जैसा कि पहले ही से संदेह के घेरे में चली आ रही जांच कमेटी ने समय पर कार्य पूरा नहीं करके दो माह का अतिरिक्त समय मांगकर संदेहों को और पुख्ता करने का काम किया है ।

टी.सी.गुप्ता जी पर भी खबरों के माध्यम से जानकारी अनुसार भृस्टाचार के गंभीर आरोप लगे हुए हैं , जाँच प्रभावित होने का संदेह पैदा हो गया था परन्तु उनकी ही टीम के एक सदस्य सुभाष यादव जी के सेवानिवृति के आदेशों ने जाँच प्रक्रिया को भटकाने व लंबित रखने की ओर संकेत किया है , यह जाँच पूरी होने उपरांत भी सेवानिर्वर्ती दी जा सकती थी किन्तु मामला चूंकि बड़े मगरमच्छों के शामिल होने का है इस शराब घोटाले में तो कहीं न कहीं जाँच पूर्ण होने से पूर्व ही उनको सेवनिर्वित करना संशय में डालता है ,सरकार को सख्त रुख अपनाने की बजाय उसमें ढील देना अखर रहा है प्रदेश की जनता को ।

इससे सरकार में दबंग गृहमंत्री श्री अनिल विज साहब की छवि पर भी सवालिया निशान लगने आरंभ हो चुके हैं और उनके आदेशों की गंभीरता को हल्के में लेने लगे हैं और ईस राजनीतिक रस्साकशी से उपजी वर्चस्व की लड़ाई के चलते लोग तो यहां तक कहने लगे हैं कि शेर तो है मगर बेड़ियों में जकड़ा हुआ है और शायद उनकी पकड़ भी ढीली होने लगी है , ताजा प्रकरण को देख कर यही प्रतीत भी हो रहा है ।
बकौल तरविंदर सैनी समाजसेवी ( माईकल ) एस.ई.टी. को अतिरिक्त समय देना दुर्भाग्यपूर्ण होगा - जनता के सामने मजबूत उदाहरण पेश करना चाहिए था मगर कहीं न कहीं सरकार का सँगरक्षणवाद साफ झलक रहा है , नहीं लगता है कि जाँच किसी नतीजे पर पहुंचेगी और शराब घोटाले के मुख्य दोषियों पर कोई कार्यवाही होगी ।


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