भारत फर्स्ट कार्यक्रम में घरेलू हिंसा - इसके सामाजिक व कानूनी पहलू विषय पर वेबिनार आयोजित


-जिले,प्रदेश के कई एन जी ओ, महिला सामाजिक कार्यकर्ता, जिला सुरक्षा अधिकारी व वरिष्ठ सेवा निवृत्त पुलिस अधिकारी ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

-अधिवक्ता मनीष शांडिल्य ने बतौर मुख्य वक्ता कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

गुरुग्राम :लॉकडाउन में बढ़ते घरेलू हिंसा की खबरों को देखते हुए सोमवार को घरेलू हिंसा और इसके सामाजिक व कानूनी पहलू विषय पर एक ऑनलाइन चर्चा आयोजित हुई जिसमें प्रदेश और जिले की महिला सामाजिक  कार्यकर्ताओं समेत महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर कार्य करने वाली कई एन जी ओ व सेवा निवृत्त वरिष्ठ पोलीस अधिकरियों ने चर्चा में हिस्सा लिया। कुछ एन जी ओ ने इंदौर, चंडीगढ़ और पंचकुला से भी हिस्सा लिया।

इसमें विशेष तौर से जिला सुरक्षा अधिकारी मीना कुमारी ने कानूनी पहलू पर बात की जबकि अतिथि वक्ता के तौर पर सोहना विधायक की पत्नी समाजसेविका श्रीमती वंदना सिंह ने अपने अनुभव साझा किए और अपने क्षेत्र में इस प्रकार की हिंसा पर  सामाजिक व्यवस्था के बारे में विस्तार से बताया । इसमें राष्ट्रीय सेविका समिति की कई महिला कार्यकर्ताओं व अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम के आई टी संयोजक श्री अनिल जी जबकि कार्यक्रम की सहसंयोजिका श्रीमती आर के शर्मा, अनिता सिंह व जसबीर रहीं। चर्चा में कहा गया कि घरेलू हिंसा एक अभिशाप है और इस बुराई को जड़ से खत्म करने की जरूरत है जिसपर अनुभवी महिला कार्यकर्त्ता समाज मे काम करे, पीड़ित महिलाएं या परिवार समाज मे अपनी बात रखे और सामाजिक लोग इस मुद्दे को घर बैठकर सुलझाएं और पुलिस या अदालत के पास तुरंत न जाएं परन्तु अगर लगे कि मामला संगीन है तो तुरंत कानूनी मदद लेने में भी परहेज न करें।

कार्यक्रम अध्यक्ष और मुख्य वक्ता तथा पारिवारिक विवाद- कानूनी मामलों के जानकार के तौर पर अधिवक्ता मनीष शांडिल्य ने कहा कि आजकल न्यायालय भी मिडिएशन (मध्यस्तता) को प्रेरित कर रही हैं ताकि परिवार ना टूटे। सिर्फ अहंकार के टकराव से समाज और हमारी परिवार व्यवस्था खराब होती है जिसका सबसे बुरा प्रभाव छोटे बच्चों नौनिहालों पर पड़ता है और आने वाली पीढ़ी की परवरिश अच्छी नही हो पाती। परिवार के साथ वे भी अवसाद ग्रस्त रहते हैं और उनका मानसिक और शारीरिक विकास बाधित होता है। हमारी स्त्री पूजा की समृद्ध परंपरा रही है और विद्या, धन और शक्ति की देवी के रूप में माँ सरस्वती, मां लक्ष्मी और माँ दुर्गा की पूजा करते आये हैं अतः स्त्री प्राचीन काल से ही पूजनीय रही हैं। कालांतर में बदलते समाज और परिवेश के कारण तथा न्यूक्लियर परिवार के चलन के कारण सबमें सहनशीलता का अभाव आया है जिससे भी बहुत हद तक इस प्रकार की घटनाएं बढ़ी हैं। अतः परिवार को प्रेम, विश्वास, समझदारी और सहनशीलता से चलाना चाहिए ताकि हम एक बेहतर समाज और स्वर्णिम भारत का सपना साकार कर सकें। ज्ञात हो कि

भारत फर्स्ट संस्था के अन्तगर्त इस वेबिनार कार्यक्रम का आयोजन किया गया । अधिवक्ता मनीष शांडिल्य ने कहा है कि भविष्य में भी ये संस्था इस प्रकार हर सामाजिक मुद्दे और राष्ट्रीय हित के विषय पर जागरूकता और सुधार के लिए कार्यक्रम आयोजित करेगी ताकि समाज मे व्यापक स्तर पर ऐसे मुद्दों पर बहस छेड़ी जाए और लोगों का नजरिया छुपाने या "जाने दो मुझे क्या" की बजाय "आओ इसे ठीक करें" हो ताकि भारत के विश्व गुरु बनने का सपना साकार हो और इसमेंआम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो।

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