भारत चीन एल ए सी पर सैनिक हथियार इसलिए नहीं रखते - कारण?

देश के तमाम लोगों में यह सवाल उठा कि क्या वजह थी  कि सैनिक अपने साथ हथियार लेकर नहीं गए। कौन कौन से समझौते है जिनके कारण चीनसे लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एल ए सी ) पर भारत के साथ चीन सैनिक भी हथियार नहीं रखते। भारत चीन के मध्य सीमा विवाद को सुलाझाने के लिए समझौते 1993, 1996, 2005, 2012, 2013 में.हुए थे

1993-----1993 चीन के समझौते के वक्त पीः वी. नरसिम्हा राव प्रधान मंत्री थे । समझौते के मुताबिक " दोनों पक्षो का मानना है कि भारत चीन के बीच सीमा विवाद शांति पूर्ण और दोस्ताना बातचीत से हल किया  जाएगा, कोई भी पक्ष ताकत का इस्तेमाल नहीं करेगा, या इस्तेमाल  की धमकी नहीं देगा"।

1996--- नवंबर 1996 में नई दिल्ली में चीन और भारत के बीच यह समझौता साइन हुआ था, उस समय मुलायम सिंह यादव रक्षा मंत्री थे और केन्द्र में तीसरे मोर्चे की सरकार थी जिसे काग्रेस का समर्थन था और एच डी देवगोंडा प्रधान मंत्री थे ।इस समझौते के तहत एल ए सी के इलाको पर शांति कायम रखने के लिए विश्वास रखना था। इस समझौते में 12 आर्टिकल थे और इनमेंसे एक आर्टिकल में कहा गया था कि कोई भी पक्ष एल ए सी के 2 कि मी के दायरे में गोले नहीं चलाएगा साथ ही  गोलीबारी,हानिकारक  रासायनिक विस्फोट, जैविक र्हाथयार , बन्दूको या विस्सफोटक से हमला नहीं करेगा। यह दोनों देशो के लिए तैनात किए जाने वाले सैनिको को निर्धारित करता है बल्कि दोनों देशो के लिए सैन्य अभ्यास के लिए अधिकत्म 15 हजार की संख्या सीमित करता है।
2005---  2005 का समझौता सीमा विवाद सुलझाने के दृष्टि कोण से मार्ग दर्शक सिद्वातं अधिकार है। 2005 समझौते मे 1993, 1996 के समझौतो की कई बातो को दोहराया गया।

2013-----2013 के बार्डर डिफेन्स कारर्पोशन एग्रीमेंन्ट के अनुसार यदि दोनो पक्षो के सैनिक  आमने सामने अाते हैं तो वे बल प्रयोग और गोलाबारी या सशस्त्र सर्घष नहीं करेगे । इस समझौते में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि भारत चीन सीमा क्षेत्र में एल ए सी पर जहाँ दोनों पक्षो के मध्य आम समझ नही है यहाँ पर दूसरे पक्ष का पीछा नही करना चाहिए।

बतादे कि गलवानघाटी में चीनी सैनिको की झडप की घटना के बाद दोनों देशो में तनाव है और भारत ने कड़ा रुख अरिव्तयार किया है। सूत्रो के अनुसार इसी बीच चीन के साथ लगी 3500 कि मी की वास्तविक सीमा  नियंत्रण रेखा का मुँह तोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना को मोदी सरकार ने पूरी आजादी दे दी है।

सुशील धवन - स्तंभकार

(ये उनके निजी विचार हैं)

Post a Comment

0 Comments