राम सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले भगवान में से एक: बोधराज सीकरी

गुरुग्राम। राम इस धरती पर सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले भगवान में से एक हैं। वो एक ऐसे भगवान हैं। वो भगवान भी हैं और राजा भी। वो एक ऐसे राजा हैं, जो राजा भी हैं और संत भी। वो संतों के राजा हैं और राजाओं के संत हैं। वो मां को दिया पिता के वचन निभाने के लिए 14 साल के लिए वन चले जाते हैं। वो राज ऐसे छोड़ देते हैं। जैसे कुछ छोड़ा ही न हो। वो राज ऐसे पाते हैं जैसे कि कुछ पाया ही न हो। यह कहना है समाजसेवी, उद्योगपति बोधराज सीकरी का।

श्रीराम मंदिर के निर्माण कार्य शुरू होने के मौके पर अपना वक्तव्य देते हुए बोधराज सीकरी ने कहा कि श्रीराम के अलावा कौन ऐसा होगा जिसे राज जाने का दुख ही न हो। उनके अलावा कौन ऐसा होगा जिसे राज पाने का अभिमान न हो। जो वन में अभी वनवासी हैं और जो सिंहासन में भी वनवासी हैं जो सूर्यवंशी राजकुमार होकर भी खुद को ऋषि का दास बताता हो। नाथ संभुधनु भंजनिहारा, होईहै कोउ एक दास तुम्हारा।

भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण का शुभारंभ हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री और हिंदू ह्दय सम्राट नरेंद्र भाई मोदी द्वारा 5 अगस्त 2020 को पावन भूमि अयोध्या में किया जाएगा। जिसमें भारतवर्ष की समस्त नदियों का जल और तीर्थ स्थलों की पवित्र मिट्टी मंदिर की नींव में अर्पित की जाएगी। इस पावन शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री का एक वाक्य याद आता है, जब अपै्रल 1991 में मुरली मनोहर जोशी के साथ विवादित क्षेत्र के दौरे के दौरान उन्होंने कहा था कि जिस दिन मंदिर निर्माण आरंभ होगा, वह पुन: वापस आ जाएंगे। और यह संयोग ही है कि सुप्रीमकोर्ट से मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद नरेंद्र भाई मोदी 5 अगस्त को राम मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे हैं।

राम मंदिर निर्माण के लिए हमारे सनातन धर्म के अनेक वीरों ने अपने प्राणों की आहुतियां दी हैं। हिन्दुओं का वही भव्य मंदिर का 450 वर्षों का संघर्ष का सपना आज चरितार्थ हो रहा है। 450 सालों में 4 लाख लोगों के बलिदान, लाखों कार सेवक, राम भक्तों का अपने परिवार, कैरियर की कुर्बानी आज चरितार्थ हो रही है। राम मंदिर करोड़ों लोगों के लिए आस्था का विषय है और करोड़ों लोगों की आकांक्षा पूरी हो रही है। कोविड-19 के कारण अयोध्या में विशाल जनसमूह एकत्र होना संभव नहीं है अन्यथा लाखों-करोड़ों लोग अयोध्या में इस महान अवसर पर उपस्थित होते। अत: आप सभी से प्रार्थना है कि 5 अगस्त को अपने-अपने घरों पर दीप प्रज्जवलित करें, ताकि दीपों के माध्यम से भगवान श्रीराम के चरणों में सांकेतिक उपस्थिति दर्ज करा सकें।  

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