निकिता के परिवार ने समझौता कर लिया था और यहीं उनसे एक बड़ी गलती हो गई.

 निकिता की हत्या हिंदू बेटियों के धर्मांतरण का षड्यंत्र : कुं. संदीप रावत (अखिल भारतीय भवानी सेना हरियाणा)


   

23 अप्रैल 1931 को महात्मा गांधी ने एक लेख में लिखा था कि दूसरों के धर्म को कम करके नहीं आंकना चाहिए और किसी का धर्म परिवर्तन करने की कोशिश करना बीमार मानसिकता की पहचान है. इसी बीमार मानसिकता ने हरियाणा के फरीदाबाद जिले में निकिता तोमर की जान ले ली और निकिता की गलती सिर्फ इतनी थी कि इसने तौसीफ नाम के एक लड़के से शादी करने से इनकार कर दिया था. सोमवार 26 अक्टूबर को तौसीफ और उसके दोस्त रेहान ने कॉलेज में परीक्षा देकर घर लौट रही निकिता को सरेआम गोली मार दी.


ये वारदात देश की संसद से सिर्फ 35 किलोमीटर दूर हुई है.लेकिन इस वारदात ने ये साबित कर दिया है कि इस देश की संसद में बनने वाले तमाम कानून भी देश की एक बेटी को बचाने के लिए काफी नहीं हैं.


निकिता तोमर एक होनहार छात्रा थी जिसे 12वीं की बोर्ड की परीक्षा में 95 प्रतिशत अंक मिले थे. निकिता कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी और वो भविष्य में ऑफिसर बनना चाहती थी. लेकिन तौसीफ ने निकिता और उसके परिवार के सारे सपनों को तोड़ दिया.


निकिता का अंतिम संस्कार तो कर दिया गया. लेकिन इस मामले ने एक बार फिर एकतरफा एजेंडे की पोल खोल दी है. आपको ध्यान होगा कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश के हाथरस में  तमाम नेताओं ने अपनी राजनीति की दुकाने सजा ली थीं और हाथरस पहुंच गए थे लेकिन आज निकिता की हत्या पर पूरी तरह से चुप हैं और उनकी इस चुप्पी का राज तौसीफ के राजनैतिक कनेक्शन में छिपा है.


हाथरस की बेटी को न्याय मिलना चाहिए लेकिन उसी न्याय की हकदार निकिता और उसके जैसी बेटियां और महिलाएं भी हैं.जिस देश में बेटियों को देवी मानकर पूजा की जाती है. उसी देश में धर्म बदलने से मना करने पर एक होनहार बेटी की हत्या कर दी गई. तौसीफ और रेहान मिलकर निकिता को जबरदस्ती गाड़ी में बिठाने की कोशिश करते हैं और जब निकिता इस जबरदस्ती का विरोध करती है तो उसे गोली मार देते हैं. यहां निकिता की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने तौसीफ से शादी करने और अपना धर्म बदलने से मना कर दिया था.



निकिता के परिवार के मुताबिक उनकी बेटी की हत्या लव जेहाद की मजहबी साजिश के लिए हुई है.यानी यहां एक हिंदू बेटी की हत्या धर्म परिवर्तन के लिए की गई है.


इस मजहबी साजिश की शुरुआत आज से दो वर्ष पहले साल 2018 में ही हो गई थी. तब इसी तौसीफ ने निकिता का अपहरण किया था, लेकिन समाज के कलंक के डर से तब निकिता के परिवार ने समझौता कर लिया था और यहीं उनसे एक बड़ी गलती हो गई.



अब इस मामले पर राजनीति शुरु हो गई है और एक बेटी की हत्या पर हो रही ये सियासत भी देश देख रहा है. हालांकि देश में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो तर्क देंगे कि भारत में लव जेहाद जैसा कुछ नहीं है लेकिन यहां सवाल उस मजहबी कट्टरता का है, जिसमें कभी बल्लभगढ़ में निकिता तोमर तो कभी दिल्ली में राहुल की हत्या कर दी जाती है. बीच सड़क पर जान ले ली जाती है और देश का टुकड़े-टुकड़े गैंग, मोमबत्ती गैंग और बुद्धिजीवी पत्रकार सिर्फ उन्हीं मुद्दों की बात करते हैं जो उनके एजेंडे को पूरा करती है.

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