झोलियां क्यों फैलानी पड़ी भाजपा की खट्टर सरकार को : माईकल सैनी



झोलियां क्यों फैलानी पड़ी भाजपा की खट्टर सरकार को : माईकल सैनी 

विकास के नारे को लगाने वाली सरकार कहती रही है कि हमने विकास करके दिखाया है और प्रदेश की जनता हमें इसके लिए भारी मतों से विजयी बनाएगी , कभी कहते हैं विश्व में सबसे बड़ा सँगठन है हमारा जिसके करोडों कार्यकर्ता हैं और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी हमारे नेता हैं हम उनके नाम पर ही चुनाव जीत जाएंगे  तथा अपनी नीतियों को सही ठहराते हुए कहते हैं कि हमने बेहतर कृषि कानून बनाया है  हम उसको लेकर किसानों के बीच जायेंगे और चुन लिए जाएंगे , कभी कहते हैं कि हम खिलाड़ियों को सम्मान देने के नाम पर जीतेंगे - तो ऐसी क्या नोबत आन पड़ी कि भाजपा सरकार और उनके सहयोगियों को झोली फैलानी पड़ गई ?  

यह सर्वविदित है कि जब-जब राजा ने झोली फैलाई है तब-तब कोई न कोई आपातस्थिति उतपन्न हुई है घोर अनर्थ ही हुआ है ।

बड़ी ही विचित्र बात है कि बरोदा उपचुनाव में भाजपा ने सुप्रसिद्ध पहलवान प्रत्याशी को मैदान में उतारा है जिसे बच्चा बच्चा जानता है  मगर सूबे के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर साहब ही उन्हें नहीं जानते - अब सवाल यह उठता है कि विश्वप्रसिद्ध पहलवान नहीं उम्मीदवार या फिर मुख्यमंत्री जी की अस्वस्थता के चलते उनकी मनोदशा ठीक नहीं चल रही   परन्तु आमजन किसको वोट दे अर्थात किसके लिए मुख्यमंत्री जी ने झोली फैलाई है  योगेंद्र पहलवान या योगेश्वर दत्त पहलवान के लिए यह उनके समक्ष में नहीं आ रहा है !

बरोदा उपचुनाव के लिए रणनीति और प्रचार में व्यस्त हरियाणा सरकार तथा भाजपा 31-अक्टूबर को सरदार पटेल जी के शहीदी दिवस और 1- नवंबर हरियाणा दिवस जैसे राष्ट्रीय आयोजनों को स्थगित कर दिया गया है और अब उसे 2- नवंबर को सचिवालय में मनाया जाएगा ऐसा सरकार का कहना है - बड़ा सवाल है कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस को भी तय समय के बाद अगली किसी तिथि पर मना सकती है क्या भाजपा सरकार यदि कहीं कोई चुनाव चल रहा हो तो ?

सभी मान-मर्यादाएं भूलने वाली दुर्भाग्यपूर्ण सरकार के मुखिया झोली पसार रहे हैं आपको बीच समय दे रहे हैं मगर यही वह मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने योगेश्वर दत्त को मिलने का समय तक नहीं दिया था - हरियाणा दिवस की महत्ता को भूलने वाली ऐसी सरकार के लिए उम्मीदवार का नाम भूलना कोई बड़ी बात नहीं !

कार्यकर्ताओं के समक्ष झोली फैलाकर स्वांग भरने वाली पार्टी ने कभी अपने कार्यकर्ताओं को समय नहीं दिया ,सदैव जूते की नोंक पर रखा तथा अब उनसे सहानुभूति जुटा रही है ताकि चुनाव जीत पश्चात फिरसे उनकों अच्छे से मसल सके इसलिए - अपने कार्यकर्ताओं से मिलने का समय नहीं देने वाले बरोदा की जनता को समय देने उनका हक़ देने की बात कर रही है , क्या वास्तव में फिर एक बार झूठे वायदों का लाभ लेने में सफल हो पाएगी भाजपा यह देखने वाली बात होगी मगर बकौल तरविंदर सैनी ( माईकल ) लोसुपा  का कहना है कि किसानों से मिलने का समय नहीं जिनके पास , उनसे आशा वर्कर्स बहने क़ई माह से मिलने का समय मांग रही हैं झोली फैलाकर , रोड़वेज कर्मचारियों ने भी समय मांगा और पीटीआई टीचर भी समय मांग रहे हैं महीनों से झोलियां फैलाकर - उन्हें मिला तो क्या मिला जिल्लत और रुसवाई के इलावे लाठियां डंडे , पानी की बौछारें , अश्रुगैस के गोलों का जहरीला धुंआ और गोलियां का डर ? कहाँ का न्याय और कैसा न्याय देने वाले लोगों की सरकार है इसपर निर्णय ले चुकी है जनता जिससे भयभीत होकर ही झोलियां पसार रहे है भाजपा सरकार और उनके मौकापरस्त सहयोगी ।

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