अंतराष्ट्रीय पुरुष दिवस के अवसर पर “पौरुष” द्वारा पुरुष-आयोग के गठन हेतु परिचर्चा आयोजित


अन्तर-राष्ट्रीय पुरुष दिवस के अवसर पर “पौरुष” द्वारा –

पुरुष-आयोग के गठन हेतु परिचर्चा आयोजित



इंदौर, 20 नवम्बर 2020,


              अन्तर-राष्ट्रीय पुरुष दिवस के अवसर पर पुरुष अधिकारों के लिए कार्यरत सस्था “पौरुष” के द्वारा प्रेस परिसर स्थित महफ़िल रेस्टॉरेन्ट में  एक परिचर्चा आवोजित की गई,जिसका विषय था “वर्तमान समय में पुरुष आयोग का गठन क्यों जरूरी है? ” कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता थे चर्चित निर्भया प्रकरण, राम-रहीम, आशाराम बापू एवं हाथरस प्रकरण में पैरवी करने वाले सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. ए.पी. सिंह.


              वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. ए.पी. सिंह ने अपने द्वारा पैरवी किये गए देश चर्चित एवं विवादास्पत प्रकरणों के उदहारण देते हुए बताया कि महिलाओं के लिये 65 कानून एवं डेढ दर्जन हेल्पलाइन, हेल्पडेस्क, महिला थाना, महिला आयोग इत्यादी होने के बावजूद भी 88% आयकर एवं 95% जी.एस.टी. देने वाले पुरुषों के पक्ष में एक भी कानून नहीं होने के कारण प्रतिवर्ष लाखो पुरुष एक पक्षीय जेंडर बायस्ड कानूनों के दुरुपयोग के कारण आत्महत्या कर रहे है.


               डॉ. ए.पी. सिंह का कहना है यदि महिला आयोग, महिला मंत्रालय एवं महिला थाना है, तो पुरुष आयोग अथवा पुरुष मंत्रालय क्यों नहीं है. उनका कहना है कि यदि पुरुष आयोग होता तो सुशांतसिंह राजपूत, भय्यु जी महाराज, बक्सर कलेक्टर मुकेश पाण्डेय, डी.आई.जी. बोरना, सहारनपुर एस.पी. सुमित दास, दिल्ली एसीपी अमित सिंह एवं पत्रकार कल्पेश याग्निक आत्महत्या नहीं करते. डॉ. सिंह का मानना है कि पुलिस, समाज, मीडिया, राजनीति एवंज्युडिशियरी तक की मानसिकता पूरी तरह से फेमिनिस्ज से ग्रसित है. मर्द की पीड़ा एवं प्रताड़ना कोई समझना ही नहीं चाहते है इसलिए अवसाद ग्रस्त विवाहित पुरुष लाखो की संख्या में प्रतिवर्ष खुदकुशी कर रहे है उन्होंने बताया कि तथाकथित पुरुष प्रधान समाज की गलत अवधारणा के चलते मुकदमों की पैरवी के दौरान बड़ी अदालतों को भी वे बमुश्किल इस बात से सहमत करा पातें है कि मर्द भी प्रताड़ित होते है. उन्होंने संस्था “पौरुष” द्वारा किये जा रहे कार्यो की सराहना करते हुए कहा कि आप लोग कई लोगो के जीवन एवं परिवारो को बचा रहें है. उन्होंने बताया कि उनके पास कई सांसदों, विधायको, आई.ए.एस. , आई.पी.एस , एवं  न्यायिक अधिकारियो के प्रकरण मौजूद है.


       परिचर्चा के पश्चात प्रश्नोत्तरी काल में कुछ पीड़ित लोगो ने भी डॉ. सिंहसे अपने मुकदमों के बारे में सलाह ली. कार्यक्रम का संचालन श्री अशोक दशोरा ने किया तथा आभार प्रदर्शन अधिवक्ता कन्हैयालाल यादव ने किया.

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