राव इंद्रजीत पर तो टोंट नहीं था काली कातर ? :माईकल सैनी




तीनों कृषिकानूनों को जायज बताने  वह कितने प्रभावी और लाभकारी है  तथा उनसे कितने बड़े विकास होने की संभावनाएं देखती हैं मोदी सरकार किसानों के लिए और यह कानून बनाने का निर्णय किसान हितों के मद्देनजर ही लिया गया है - समझाने के लिए ही पश्चिमी, उत्तरी और पूर्वी हरियाणा को छोड़ मुख्यमंत्री जी ने दक्षिणी हरियाणा जैसे शांतिप्रिय क्षेत्र अहीरवाल के एक जिले नारनोल को भले ही चुना हो किसी भी विरोध से बचने के लिए  मगर किसानों के जबरदस्त विरोध का सामना उन्हें यहाँ भी झेलना पड़ा , बड़ी फाजिहत हुई ,लोगों से तृस्कृत होना पड़ा - जिस माहौल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए खट्टर साहब ने कहा कि काली कातर आले मिलेंगे यह उन्हें आभास था ।

मुख्यमंत्री जी का यह बयान कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे उन किसान आंदोलनकारियों के लिए हो सकता है जिन्होंने किसान रैली में अपना विरोध काले झंडे दिखाकर दर्ज कराया और भाजपा सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाए और  गो-बैक खट्टर साहब के नारे लगाए उनके लिए - जो प्रतिक्रिया देना सौभाविक भी लग रहा था उनकी तरफ से - मगर एक महत्वपूर्ण दृश्य को शायद देखना भूल गए अथवा उनका संदेश कुछ ओर भी हो सकता है  जिसके विभिन्न प्रकार के कयास लगाए जा रहे हैं आमजन द्वारा !

दरअसल एक ओर प्रदर्शनकारियों पर वह टिप्पणी कर रहे थे और वहीं उनके साथ ही मंच साझा कर रहे दक्षिण हरियाणा के सांसद राव इंद्रजीत सिंह जी ने भी काली पोशाक डाल रखी थी !

गौर करने लायक बात यह है कि मुख्यमंत्री जी के भाषण के आरंभ होने से पूर्व ही सांसद साहब वहां से रूकस्ती ले चुके थे , ईससे यह स्पस्ट होता है कि जिस प्रकार पहले भी मंच साँझा तो हुए मगर मुख्यमंत्री जी के भाषण को कभी नहीं सुनने वाले बड़े राव ने फिर यह संदेश दिया है कि मनोहर लाल खट्टर साहब का कद आज भी उनके समान नहीं - हो सकता है कि यही बात मुख्यमंत्री जी को नागवारा गुजरी हो और उनकी काली कातर वाली प्रतिक्रिया इसी वाक्ये से सम्बंध रखती हो   क्योंकि बड़े राव से उनका तालमेल कभी ठीक से बैठा दिखाई नहीं दिया क्षेत्र की जनता को इसलिए ?

देशभर के किसान आंदोलन कर रहे हैं अब ऐसे में अहीरवाल के तथाकथित राजा कैसे पीछे रह सकते थे तो कहीं न कहीं उनका काली पोशाक में आना भी एक प्रकार का विरोध जताना ही समझा जा सकता है - अब किसे पता कि किसके विषय में कहा है मुख्यमंत्री जी ने यह बाद का विषय है ...

मगर आज जिस प्रकार प्रदेशभर के किसानों ने मुख्यमंत्री जी का घेराव करना शुरू किया है रोड ब्लॉक किए जा रहे हैं , टोल नाके फ्री करने की कोल दी जा चुकी है ,मंत्रियों, विधायकों के काफिलों के घेराव हो रहे हैं ,काले झंडे दिखाए जा रहे हैं और हालिया वाकये से जिसमे घेराव ,पथराव ,लाठी-डंडों से प्रहार किए जाने की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हो रही हैं  उससे तो साफ प्रतीत होता है कि सरकार अब कुछ और दिन की मेहमान रह गई है ।

विधायक उम्मीदवार तरविंदर सैनी ( माईकल ) के अनुसार हरियाणा सरकार अपने कार्यकर्ताओं की मार्फ़त लोगों को भृमित करने का काम कर रही है तीनों काले कानूनों को सही साबित करने में प्रयासरत है मिथ्या प्रचारों के और मीडिया के माध्यम से , जब्कि स्तितियाँ इसके ठीक विपरीत नजर आ रही हैं ।

अब मुख्यमंत्री जी को अपनी खीज कहीं और न उतारते हुए सयम से काम लेकर आत्मचिंतन व मनन करना चाहिए ।

Post a Comment

0 Comments