आज का भारत बंद सफलता किसानों की या सरकार की ? : माईकल सैनी

आज का भारत बंद  सफलता किसानों की या सरकार की ? : माईकल सैनी



किसान आंदोलनकारियों तथा उनके समर्थकों की माने तो आज का बुलाया गया भारत बंद शांतिप्रिय तथा ऐतिहासिक रहा , किसान संगठनों - आंदोलनकारियों के आवाहन पर देशभर में बंद का असर देखने को मिला  राष्ट्रीय मार्गों , राजमार्गों से लेकर शहरों की प्रमुख सड़कों व धरनास्थलों पर भीड़ उमड़ पड़ी , काले कानूनों को निरस्त करने की मांगें जोरदार तरीके से रखी और सरकार को तीनों कानूनों को समाप्त करने के लिए बाध्य किया गया , भाजपा सरकार होश में आओ  मोदी, योगी, खट्टर मुर्दाबाद के नारे लगाए गए !


तमाम राजनैतिक दलों की मानें तो भारतबंद पूर्ण रूप से सफल रहा किसानों के प्रति उनके दल के समर्पण भाव किसानों के लिए भोजन पानी की व्यवस्था की गई तथा वरिष्ठ नेताओं के धरनास्थलों पर आक्रामक तेवरों में दिए गए भाषणों से बहरी सरकार के कान खोल दिए !

प्रशासनिक अधिकारियों से तीखी नोक-झोंक की छुटपुट घटनाओं के बीच सरकार को किसानों की मांगें मानने और तीनों कानूनों को रद्द करने के लिए बाध्य करने का काम किया गया ।


दक्षिणी हरियाणा की अहीरवाल बेल्ट में तथाकथित राजा  कहे जाने वाले मोजूदा सांसद राव इंद्रजीत सिंह जी की किसान आंदोलनकारियों से बेरुखी के कारण और प्रशासनिक अधिकारियों की अत्याधिक सख्ती के चलते  जरूर बंद का असर फीका रहा मगर क़ई संगठनों सहित 360 गांवों की पंचायतो ने भारतबंद मुहिम का हिस्सा बनकर किसानों की मांगों को मनवाने के लिए केंद्र सरकार की कुनीतियों का विरोध करते हुए तीनों काले कानूनों को समाप्त करने की मांगे रखी ।


दूसरी ओर सरकारी दावे बिल्कुल विपरीत है सरकार की मानें तो बंद का असर आंशिक तौर पर भी नहीं के समान रहा , तमाम  सरकारी काम-काज सुचारू रूप से चलते रहे , सभी बाजार - दुकानें, मॉल्स , व्यापारिक प्रतिष्ठान कारखाने  आम दिनों की तरह खुले रहे , प्रशाशन की मुस्तैदी से किसी भी अप्रिय घटना के घटने की कोई भी सूचना सामने नहीं आयी , यातायात भी कुछ समय के लिए धीमी गति से जरूर चला मगर उसे अवरुद्ध नहीं होने दिया गया  - चौकस सरकार ने सभी प्रकार के सुरक्षा इन्तेजामात कर रखे थे व किसी भी उपद्रव अथवा भिड़ंत की स्तिथि के लिए खुफिया तंत्र के साथ पुलिस विभाग , स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन , एम्बुलेंस सभी को हाई अलर्ट पर रखा गया था , विपक्ष की चाल को फलीभूत नहीं होने दिया गया जिसके चलते भी आज का भारतबंद सफल नहीं हो पाया ।


बकौल तरविंदर सैनी ( माईकल ) लोसुपा  लोगों द्वारा लोगों के लिए लोकतांत्रिक प्रणाली से चुनी हुई सरकार के समक्ष अपनी बातें रखने का सभी को हक़ अधिकार प्राप्त  है , धरने प्रदर्शन को भूख हड़ताल तक नहीं पहुंचने देना चाहिए सरकारों को भी  परन्तु यहाँ तो बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा हो गया मगर क्यों यह विचारणीय विषय है - आखिर सरकार किसानों का जबरन भला करने पर आमादा क्यों हैं  जब्कि किसानों ने ईन कानूनों को मानने से साफ इंकार कर दिया है तो उनपर किसके कहने और किस लालच में काले कानूनों को थोपना चाहती है सरकार ?

सरकार को किसानों की मांगों को मानकर ईन कानूनों को निरस्त करते हुए उनसे परस्पर चर्चा करके नए सिरे से कानून बनाए उनकी सहमति लेकर यदि उनका सच में हित चाहती है तो - मगर लगता नहीं है कि सरकार की कोई दिलचस्पी है ईस मसले को हल करने में - शायद वह किसानों का पराक्रम देखना चाहती है या उपद्रवियों की सहायता से इन्हें कुचलना चाहती है - भ्रामक प्रचारकों को तो लगाया हुआ ही है किसानों के पीछे और कुछ निकम्मे मंत्रियों की टीमें गठित कर रखी है वार्ताओं का खेल खेलने के लिए , यह बात मिथ्या है तो बताए कि समाधान में समय क्यों लगा रही है ?

 एक ही दिन में फैंसले ले सकती है सरकार मगर उहापोह की स्तिथि बनाए हुए हैं  स्पस्ट तौर पर कहे ना कि आखिर वह करना क्या चाहती है ?

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