बेटी के जन्म के बाद अस्पताल से घर आने पर मनाया उत्सव



लड़का-लड़की में फर्क खत्म हो, इसलिए बेटी के जन्म के बाद अस्पताल से घर आने पर मनाया उत्सव, नवजात कन्या का फूल बरसाकर किया जोर-शोर से स्वागत 



केकड़ी। बेटीम अजेयभारत। टियों के प्रति अब समाज की सोच बदलने लगी है। बेटियों को समाज में बोझ समझने की मानसिकता में बदलाव लाने की सकारात्मक पहल सोमवार को शहर में दिखाई दी। अब बेटियों के जन्म पर मातम नहीं खुशियां मनाई जाती है। बेटों की तरह बेटियों का स्वागत भी फूलों से होता है और मिठाईयां भी बांटी जाती है। राष्ट्रीय बालिका दिवस के अगले दिन केकड़ी में भी कुछ ऐसा ही नजारा एक बेटी के जन्म पर देखने को मिला। 


लड़का और लड़की में भेदभाव रखने वालों के लिए शहर के गुजराती मौहल्ला निवासी सेवानिवृत्त शारीरिक शिक्षक बिरदीचन्द वैष्णव का परिवार मिसाल है। वैष्णव ने बेटी बचाओ का संदेश देते हुए अपनी पौत्री के जन्म के बाद अस्पताल से लौटने पर उत्सव मनाया। उनके घर में सभी की इच्छा थी कि बिटिया का स्वागत बहुत अच्छे से हो। 



बिटिया के पिता शिक्षक दिनेश कुमार वैष्णव ने बताया कि गत शुक्रवार को उनकी पत्नी नेहा ने केकड़ी के जिला अस्पताल में एक बेटी को जन्म दिया। बेटी के जन्म पर माँ-पिता सहित परिवार ने खुशी जताई। सोमवार को जब जश्न भरे माहौल में अपनी बेटी के साथ नेहा घर पहुंचीं तो परिवार के सदस्यों ने नवजात बच्ची की आरती उतारी और गुलाब के फूलों की बारिश की। साथ ही मिठाइयां भी बांटी गईं। माता-पिता ने नन्हे कदमों की छाप लेकर उसे घर में प्रवेश कराया। यह नजारा देख मौहल्ले में भीड़ लग गई। 



इस मौके पर परिवार के सदस्यों का कहना था कि बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं है। बेटी के आने से परिवार का हर सदस्य बेहद खुश है। वैष्णव कहते है कि बेटों की चाहत में बेटियों की भ्रूण हत्या करना दुनिया का सबसे बड़ा पाप है। 


उन्होंने कहा कि यह स्वागत बेटियों के प्रति बढ़ रहे भेदभाव को कम करने के लिए किया गया है। आस-पड़ोस की महिलाओं ने वैष्णव परिवार की इस पहल पर खुशी जाहिर कर मंगल गीत गाए। 


उल्लेखनीय है कि बिटिया के पिता दिनेश कुमार वैष्णव राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मण्डा में शिक्षक के रूप में कार्यरत है। शिक्षक वैष्णव क्षेत्र में अपने नवाचारों के लिए भी जाने जाते है। वैष्णव ने अपनी पहली बेटी यशस्वी के जन्म पर भी मण्डा विद्यालय के एक कक्ष को शिशुवाटिका के रूप में विकसित करवाया ताकि कक्षा कक्ष रुचिकर, ज्ञानवर्धक और आकर्षक बन सकें व साथ ही प्राथमिक शिक्षा में विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ें और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकें।

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