आखिर वैक्सिनेशन से हुई 2,771 मौतों का जिम्मेदार कौन?

 


गुरूग्राम। अजय वैष्णव। कहने के लिए सारा विश्व और भारत कोविड-19 कोरोना से लड़ रहा है लेकिन इसी बीच बहुत सी खबरें आती रहती हैं कि कोरोना कोई महामारी नहीं है बल्कि एक सामान्य फ्लू है जिसे जानबूझकर वैश्विक ताकतों, डब्ल्यूएचओ व कुछ बड़ी दवा कंपनियों के द्वारा पूर्व नियोजित तरीके से वैक्सीन का बाजार खड़ा करने के लिए लाया गया है



वैक्सिनेशन को लेकर गुरुग्राम के वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता व अधिवक्ता मोहित खटाना ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को एक आरटीआई के माध्यम से पूछा कि वर्ष 1988 से आज तक सभी प्रकार के वैक्सिनेशन के द्वारा भारत में कुल कितनी मोते हुई है जिसके उत्तर में वर्ष 2012 से मौतों का आंकड़ा 2771 बताया गया है जबकि 1988 से 2011 तक का आंकड़ा छुपा लिया गया है 


खटाना का कहना है कि केंद्र व राज्य सरकारें कोरोना वैक्सीन को कौन से विज्ञान के आधार पर पूरी तरह से सेफ बता रही है? सबसे पहले देशवासियों को इसका जवाब दिया जाना चाहिए उसके बाद बताया जाए इतिहास में वैक्सिनेशन से 2771 लोगों की मौत क्यों हुई ?


आरटीआई में दिए गए आधे अधूरे जवाब से ये जाहिर होता है कि सरकार के पास तो यह पूरा आंकड़ा है लेकिन सरकार इस जानकारी को देने से डर रही है क्योंकि कहीं ना कहीं वैक्सीन को लेकर लोगों में एक जागरूकता आ जाएगी और कोविड वैक्सीन को लेकर भय व्याप्त हो जाएगा व प्रश्नचिनह लग जाएगा और लोग वैक्सीन लगवाने को लेकर तैयार नहीं होंगे


दोस्तों क्या आप जानते हैं कि वैक्सीन को एक लंबा समय लगता है बनाने में फिर कई साल लग जाते हैं उसके ट्रायल को करने में और फिर कई साल लग जाते हैं उसके दुष्प्रभावों को देखने में लेकिन कोरोना के नाम पर लोगों में लगाई जाने वाली वैक्सीन खुद सरकारी विभागों के 5 वर्षों तक के पुराने नियमो को दरकिनार करके मात्र 9 महीनों में तैयार करके नागरिकों को लगानी भी शुरू कर दी है


इसके पीछे आखिर क्या माजरा है कि एक तरफ तो सरकारे राष्ट्रीय स्तर पर कॉलर ट्यून के द्वारा करोड़ो अरबों रुपए की एडवरटाइजमेंट के द्वारा लोगो को सोशल डिस्टैंस का पालन करने मास्क पहने रखने व वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित कर रही है दूसरी तरफ खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह व ढेरों पार्टियों के नेता लोग चुनावों में हजारों लाखो की भीड़ को बगैर मास्क बगैर सोशल डिस्टैंस के संबोधित करते दिखाई देते है जिससे ना तो किसी की कोरोना से मृत्यु होती है ना कोई बीमार होता है और ना आपातकालीन स्थिति पैदा होती है


यदि वास्तव में कोरोना इतनी बड़ी महामारी है तो हमारे देश में लाखों किसान महीनों से दिल्ली बॉर्डर पर बैठकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं वो भी बिना मास्क व बिना सोशल डिस्टेंसिंग के जिसके बावजूद किसी भी किसान को कोरोना नहीं हुआ आपातकाल की स्थति पैदा हुई


अजेयभारत को जानकारी देते हुए अधिवक्ता मोहित खटाना ने बताया सरकारी व गेर सरकारी वर्ग के लोगों को वैक्सीनेशन कराने से पहले ये जान लेना चाहिए कि कोरोना के नाम पर लगाई जाने वाली वैक्सीन में क्या क्या इंग्रेडिएंट्स इस्तेमाल किए गए है क्योंकि ये हमारा फंडामेंटल राइट है की हमारे शरीर में जिन तत्त्वों का मिश्रण डालने के लिए सरकार दिन रात प्रचार कर रही है उसकी हमे विस्तार से पूरी जानकारी दी जाए और उतना ही प्रचार करना चाहिए जितना सोशल डिस्टैंस, मास्क व वैक्सीन को लेकर देशभर में किया जा रहा है


खटाना ने आगे बताया सरकार चाहे कितना ही वैक्सिनेशन से हुई मौतों को नकार दे लेकिन देश के लोग अब जागरूक हो गए है हमें ऐसी खबरे प्राप्त हुई है कि पुलिस विभाग व फौज में वैक्सिनेशन का कार्य तेज गति से शुरू किया गया है जिसमें पुलिस व फौजियों को टॉर्चर करके वैक्सीन लगवाने के लिए बाध्य किया जा रहा है 


देश के नागरिकों में वैक्सीन लगवाने को लेकर अनिवार्यता नहीं है 

ऐसे मामलों में सरकारी व गेर सरकारी नौकरी वाले वर्ग के लोगो को अपने उच्च अधिकारियों के समक्ष एक पत्र सोपकर 

उसकी प्रति रिसीविंग कराकर अपने पास रख लेनी चाहिए जिससे कोई भी अधिकारी वैक्सीन लगाने को लेकर बाध्य नहीं कर पाएगा


 जिसमें कुछ बिंदुओं को उल्लेखित किया जाना चाहिए


: हमें सरकारी कागजात प्रदान किए जाएं जिसमे ये जानकारी हो कि वैक्सीन में क्या - क्या इंग्रीडिएंट्स डाले गए है ।


: वैक्सीन लगने के बाद अगर हमारी मृत्यु होती है या दुष्प्रभाव होते हैं तो उसके जिम्मेदार आप होंगे मृत्यु होने पर मेरे परिवार को कम से कम 20 करोड़ व दुष्प्रभाव होने पर 5 करोड़ का मुआवजा दिया जाएगा ( स्टाम्प पेपर पर लिख कर दिया जाए )


: वैक्सीन में गाय के भ्रूण का रक्त नहीं है इसकी गारंटी स्टाम्प पेपर पर लिख कर प्रदान कि जाए ।


: वैक्सीन लगने के बाद अगर मेरी मृत्यु होती है या दुष्प्रभाव होते है तो ये खबर प्रेस कांफ्रेंस करके मीडिया के सामने बताई जाएगी और मेरे जिले में कम से कम 10 लाख पर्चे बांटे जाएंगे ( स्टाम्प पेपर पर लिख कर दिया जाए ) ।


: वैक्सीन लगने के बाद अगर मेरी मृत्यु होती है या दुष्प्रभाव होते है तो भविष्य में मेरे परिवार के किसी भी सदस्य को किसी भी प्रकार की कोई भी वैक्सीन नहीं लगाई जाएगी ( स्टाम्प पेपर पर लिख कर दिया जाए )


:  वैक्सीन लगने के बाद अगर मेरी मृत्यु होती है या दुष्प्रभाव होते है तो मैं या मेरा परिवार आपके खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज करा सकता है जिसके लिए आपको कोई आपत्ति नहीं होगी ( स्टाम्प पेपर पर लिख कर दिया जाए )


अजेय भारत को जानकारी देते हुए खटाना ने कहा एक दशक पहले ही भाई राजीव दीक्षित ने देश में फार्मा कंपनियों के षडयंत्र व इनके वैक्सीन के व्यापार के बारे में राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान चलाया था उनकी यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए देश में आज भी लाखो राजीव दीक्षित समर्थक जागरूकता अभियान चला रहे है और वैश्विक ताकतों के द्वारा देश पर की जा रही साजिशों से अवगत करा रहे है ।



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