साधु संतों व ग्रामीणो ने पहले किया कार्यालय का घेराव, फिर एडीएम को सौंपा ज्ञापन ।

 अनिश्चितकालीन धरने का 26वां दिन ।



साधु संतों व ग्रामीणो ने पहले किया कार्यालय का घेराव, फिर एडीएम को सौंपा ज्ञापन ।


आदिब्रदी के ब्रज पर्वतों पर हो रहे खनन का विरोध ।


अजय विद्यार्थी 


डीग :आदिबद्री पर्वतीय क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन के विरोध में ग्राम पंचायत पंसोपा में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को 26वें दिन भी जारी रहा। 

धरने के दौरान ग्रामीण जनप्रतिनिधियों के साथ डीग आए साधु संतों ने ककराला-डीग मार्ग को लेकर कार्यवाहक अतिरिक्त जिला कलक्टर कार्यालय का घेराव कर रास्ते को खननकर्ताओं की ओर से गैर कानूनी तरीके से उपयोग में लेने के विरोघ में उपखंड अधिकारी हेमंत कुमार को ज्ञापन सौंपकर  खननकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। 

इस दौरानअलीपुर सरपंच विजयसिंह यादव ने कहा कि अगर कोई भी वाहन इस मार्ग से होकर गुजरा तो स्थानीय ग्रामीण उस वाहन को वहीं खाली करवाकर जब्त कर लेंगे।

 मौजूद ग्रामीणों ने आदिबद्री क्षेत्र में हो रहे खनन व परिवहन को आंदोलन के चलने तक बंद रखने की मांग की ताकि किसी प्रकार के टकराव व आगजनी से बचा जा सके। 

उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी ककराला के ग्रामीणों की ओर से इस मार्ग को बंद कर खननकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है।



मानमंदिर अध्यक्ष व संरक्षण समिति के संरक्षक राधाकांत शास्त्री ने नगर तहसील के 6 गांवों में पड़ रहे आदिबद्री पर्वत के हिस्से को अविलंब वन विभाग को देने के लिए अतिरिक्त जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर कहा कि स्थानीय जनमानस के जीवन की रक्षा के लिए मार्च 2014 में तत्कालीन संभागीय आयुक्त ओ.पी. सैनी की अनुशंषा पर नगर तहसील के गांव रसूलपुर, कोडली, ककराला, बुआपुरगड़ी, नागल व बेगपहाडी को वन विभाग को स्थानान्तरित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा था जिसमें स्थानीय अधिकारियों ने लोभवश तथ्यों से परे झूठी रिपोर्ट देते हुए कहा कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए उक्त प्रस्ताव हितकर नहीं है, यह बता कर अग्रिम कार्यवाही नहीं होने दी। 

इधर आदिबद्री से जुडे 35 से अधिक गांवों के सरपंचों ने आदिबद्री को तत्काल खनन मुक्त कर वन विभाग को देने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। 

राधाकांत शास्त्री ने प्रशासन पर खनन माफियाओं को हर प्रकार का सहयोग देने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर प्रशासन ईमानदार होता तो अभी तक यह समूचा क्षेत्र सुरक्षित हो चुका होता, यहां के जन जीवन व पर्यावरण को खतरे में डालने का मुख्य जिम्मेदार यहां का भ्रष्ट प्रशासन व ऊंचे पद पर बैठे अधिकारी है। 

जिन्होंने सरकार को गुमराह कर रखा है। 

प्रदर्शन के मौके पर सरपंच ककराला जलाल खान, सरपंच सुल्तान सिंह, महमूद, हाजी कमरुद्दीन, आजाद खान, इसफ खान, डालचंद, मुहमुद्दीन खां, इस्लाम, कुंदन, भूरा बाबा, गोपाल दास, कृष्ण दास बाबा, ब्रजकिशोर बाबा आदि मौजूद थे।

Post a Comment

0 Comments