राष्ट्र जागृति के पुरोधा थे स्वामी दयानन्द सरस्वती- प्रो. आर.सी. कुहाड़

 राष्ट्र जागृति के पुरोधा थे स्वामी दयानन्द सरस्वती- प्रो. आर.सी. कुहाड़

-हकेवि में स्वामी दयानन्द सरस्वती जयंती पर किया गया हवन



महेंद्रगढ़, प्रमोद बेवल 
कुलपति ने स्वामी जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए 
भारतीय संस्कृति के उन्नायक, राष्ट्र जागृति के पुरोधा, समाज-सुधारक, गुरु की गरिमा के परिचायक स्वामी दयानन्द सरस्वती के योगदान को जितना याद किया जाए उतना कम है। स्वामी जी ने भारतीय संस्कृति व समाज सुधार के क्षेत्र में देश को एक नई राह दिखाई और आज की पीढ़ी को उनके पदचिह्नों पर चलने की जरूरत है। यह विचार हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ ने स्वामी दयानन्द सरस्वती की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। 

विश्वविद्यालय में स्वामी दयानन्द सरस्वती पीठ के द्वारा स्वामी जी की जयंती के अवसर पर शुक्रवार को हवन का आयोजन किया गया। इस अवसर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ ने कहा कि भारतीय संस्कृति पुरातन है और हमें हजारों सालों के इतिहास और उससे जुड़े महापुरूषों से सीख लेते हुए देश, समाज व मानव जाति के कल्याण हेतु कार्य करना चाहिए। कुलपति ने विद्यार्थियों को स्वामी जी जीवन से प्रेरणा लेकर समाज, देश व जनमानस की बेहतरी के लिए सर्व-समर्पण के भाव को अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति ने स्वामी दयानन्द के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। 

विश्वविद्यालय के स्वामी दयानन्द सरस्वती पीठ के पीठाचार्य प्रो. रणवीर सिंह ने स्वामी जी के जीवन आदर्शों से प्रतिभागियों को अवगत कराया और जनहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रो. सारिका शर्मा, प्रो. संजीव कुमार, प्रो. अमर सिंह, डॉ. पायल चंदेल, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. रणवीर सिंह, डॉ. अजय पाल, डॉ. सुरेंद्र कुमार, डॉ. कुमुद प्रसाद आचार्य, डॉ रवि कुमार, कु.मनीषा भाटी सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी, शिक्षणेतर कर्मचारी, शोधार्थी व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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