अवैध खनन के विरोध में किसान यूनियन के संगठनों ने आर-पार की लडाई की भरी हुंकार

 अवैध खनन के विरोध में किसान यूनियन के संगठनों ने आर-पार की लडाई की भरी हुंकार



 प्रशासन को दिया 15 दिनो का अल्टीमेटम  ।


आदिबद्री धाम पर्वतीय क्षेत्र में अवैध खनन के विरोध में पसोपा में हुई किसान पंचायत ।



अजय विद्यार्थी 



डीग  >< आदिबद्री पर्वतीय क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन के विरोध में ग्राम पंचायत पसोपा में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के 34 वे दिन गुरूवार को  किसान पंचायत में किसान यूनियनों के वरिष्ठ राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने ब्रज के पर्वतों को अविलंब खनन मुक्त करवाने का सर्वसम्मिति से प्रस्ताव लेते हुए जल्द  कार्रवाई नहीं होने पर आर पार की लड़ाई लडने की हुंकार भरी


 पिछले 20 वर्षों से समूचे ब्रज क्षेत्र का साधु-समाज व ग्रामीण कंकाचल एवं आदिबद्री पर्वतों को पूर्ण रूप से खनन मुक्त कराने के लिए संघर्षरत है। 

वर्ष 2009 में लंबे संघर्ष के बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने डीग व कामां तहसील में आ रहे पर्वतों को खनन मुक्त कर संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया था। लेकिन नगर व पहाड़ी तहसील में पड़ रहे इन्हीं पर्वतों के हिस्से को त्रुटि वश छोड़ दिया गया। तब से स्थानीय ग्रामीण व साधु समाज इनकी रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। 

आज त्रस्त व धैर्यहीन होकर 16 जनवरी 2021 से स्थानीय ग्रामीण व साधु-संत निर्णायक आंदोलन के लिए ग्राम पंसोपा में धरने पर बैठे हुए हैं। 

धरने के 34 दिन बीतने के बाद भी प्रशासन ने कोई भी कर्रवाई आगे नहीं बड़ाई है। 

पंचायत में भारतीय किसान यूनियन (भानु) के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ब्रज के पर्वत हमारे भगवान हैं व यहाँ की कृषि भूमि हमारी माँ है, इनको अगर कोई गलत दृष्टि से देखेगा तो किसान किसी भी कीमत पर यह बर्दाश्त नहीं करेगा। 



उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब ब्रज के पर्वतों का और अधिक नाश किया गया तो किसान वर्ग लाखों की संख्या में भरतपुर में अनिश्चितकालीन पड़ाव डालेगा। साथ ही प्रशासन की किसान व ब्रजवासी विरोधी गतिविधियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल बजा दिया जाएगा। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह राणा ने कहा कि सरकार साधु संतों की बात सुन ले अन्यथा ब्रज के पर्वतों के लिए ऐसा आंदोलन खड़ा कि जाएगा जो अभूतपूर्व होगा। 

पूर्व विधायक गोपी गुर्जर ने पंचायत में बोलते हुए कहा कि अशोक गहलोत सरकार ने ही वर्ष 2009 में साधु संतों की मांग मानते हुए डीग और कामां के अंतर्गत आने वाले पर्वतों को खनन मुक्त कर संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया था परन्तु नगर व पहाड़ी में उन्हीं पर्वतों के अभिन्न हिस्सों को खनन मुक्त नहीं किया गया। सरकार को अविलंब कंकाचल व आदिबद्री पर्वत को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर खनन माफियाओं के साथ लिप्त सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।  

किसान पंचायत में पंहुचे नगर विधायक वाजिव अली ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा बेहद जरूरी है। जो अवैध खनन जैसी गतिविधियां हैं वो सही नहीं है। वो इस लडाई में साधु-संत, ग्रामीणों के साथ खडे है। विधायक ने पंचायत में पूरे प्रकरण को विधानसभा में उठाने का लोगों को विश्वास दिलाया।

पंचायंत के अंत में मानमंदिर के अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री ने किसान पंचायत में पारित प्रस्ताव पर कहा कि यह पंचायत सरकार व प्रशासन को 15 दिन का समय देती है कि अगर इस अंतराल में नगर व पहाड़ी तहसील में पड़ रहे आदिबद्री व कंकाचल के हिस्से को खनन मुक्त नहीं किया गया तो भरतपुर में किसानों, ब्रजवासियों व साधु संतों का अनिश्चितकालीन महापडाव डाला जाएगा। जिसके परिणाम की जिम्मेदारी सरकार व प्रशासन की होगी।    

ककराला सरपंच जलाल खान व सरपंच सुल्तान सिंह ने किसान पंचायत में आए किसान यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को विश्वास दिलाया कि संपूर्ण ब्रज के गावों की जनता हर समय व हर प्रकार इस आंदोलन में कूदने के लिए तैयार है। पंचायत के बाद पारित प्रस्ताव को जिला कलकटर को भेजा गया। धरनास्थल पर आज गुर्जर महासभा के साथ संत सम्मेलन का आयोजन होगा। 

किसान पंचायत के अवसर आदिबद्री महंत शिवराम दास, भूरा बाबा, साध्वी मधुबनी, किसान नेता मोहन सिंह, सत्यप्रकाश यादव, सरपंच विजयसिंह, किसान यूनियन के पदाधिकारी राम सिंह, राम प्रताप सिंह, अरुण कुमार सिंह, विजय चैधरी, निहाल, देवीराम, जीतराम, बदले सिंह, सूरजमल, एडवोकेट कुलदीप बैंसला, गोपाल दास, कृष्ण दास बाबा, ब्रजकिशोर बाबा, कृष्ण चैतन्य, मुकेश शर्मा आदि सहित बडी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

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