निगम पार्षदों, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों व निजी स्कूल संचालकों के साथ परिवार पहचान-पत्र पर हुई परिचर्चा

निगम पार्षदों, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों व निजी स्कूल संचालकों के साथ परिवार पहचान-पत्र पर हुई परिचर्चा



-    हरियाणा के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी. उमाशंकर ने परिवार
     पहचान-पत्र की उपयोगिता तथा आवश्यकता के बारे में दी जानकारी
-    सरकारी सेवाओं एवं योजनाओं को सरलता से घर बैठे उपलब्ध करवाने की है मुख्यमंत्री की कल्पना

-    सरकार की धारणा है कि सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर बल दे तथा योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ नागरिकों को ऑटोमैटिक तरीके से मिले


गुरूग्राम, । शुक्रवार को गुरूग्राम के सैक्टर-27 स्थित सामुदायिक केन्द्र में परिवार पहचान-पत्र के बारे में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल के प्रधान सचिव वी उमाशंकर ने परिवार पहचान पत्र की उपयोगिता एवं आवश्यकता के बारे में निगम पार्षदों, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों तथा निजी स्कूल संचालकों को जानकारी दी।



    प्रधान सचिव ने कहा कि सरकार की धारणा है कि सरकार अपना पूरा फोकस इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने की दिशा में रखे तथा सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ नागरिकों को डिजीटल माध्मय से ऑटोमैटिक मिले। मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की इसी कल्पना के तहत सरकार द्वारा परिवार पहचान-पत्र बनाने की शुरूआत की गई है। उन्होंने कहा कि आज इनफोरमेशन टैक्नोलॉजी का युग है। सरकार द्वारा शुरू की गई पीपीपी एक ऐसी सुविधा है, जिससे आपको घर बैठे सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ मिल पाएगा। उन्होंने उदाहरण दिया कि सामाजिक सुरक्षा भत्ते के लिए हमें सभी आवश्यक दस्तावेज लेकर कार्यालयों में जाना पड़ता है, लेकिन पीपीपी के माध्यम से पूरे परिवार का बेहतर डाटाबेस होगा तथा जैसे ही परिवार का कोई सदस्य 60 वर्ष की आयु पूरी करता है, उसकी पैंशन की प्रक्रिया अन्य मापदंड वैरीफाई होने के उपरान्त शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही आने वाले समय में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री भी जिला की किसी भी तहसील में करवाई जा सकेगी। सरकार का लक्ष्य है कि आपको किसी भी सरकारी सेवा या योजना का लाभ लेने के लिए बाहर जाने की जरूरत ना पड़े।

    श्री उमाशंकर ने उपस्थित लोगों को आश्वस्त किया कि परिवार पहचान-पत्र के लिए एकत्रित किया जाने वाला डाटाबेस पूरी तरह से सुरक्षित है क्योंकि इसका उपयोग केवल सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं में ही किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीपीपी बनाने का कार्य केवल सरकार द्वारा ही किया जा रहा है तथा इसके लिए किसी भी प्राईवेट एजेंसी को शामिल नहीं किया गया है। कोई भी प्राईवेट एजेंसी इस डाटाबेस का उपयोग नहीं कर सकेगी। उन्होंने कहा कि पीपीपी में केवल वही जानकारी मांगी गई है, जो सरकारी सेवाओं को प्रदान करने के लिए उपयोगी हैं। इससे पारदर्शिता तथा तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अगर किसी व्यक्ति का पीपीपी नहीं होगा, तो उसे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि पीपीपी के लिए अलग से प्राधिकरण का गठन किया गया है तथा जल्द ही इसके लिए कानून में भी प्रावधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दौरान हरियाणा में शुरू की गई डिस्ट्रैस राशन टोकन प्रणाली को भारत सरकार ने वन नेशन-वन राशन कार्ड के रूप में आगे बढ़ाया और पीपीपी को भी पूरे देश में लागू किया जा सकता है। बैठक में उन्होंने मेरी फसल-मेरा ब्यौरा योजना तथा स्वामित्व योजना के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों में पुन: कैंप लगाने के निर्देश भी दिए तथा आरडब्लयूए प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे भी पीपीपी बनाने के कार्य को शुरू करें।

    कार्यक्रम में गुरूग्राम की मेयर मधु आजाद तथा नगर निगम गुरूग्राम के आयुक्त विनय प्रताप सिंह ने श्री उमाशंकर एवं आए हुए अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत एवं धन्यवाद किया। इस मौके पर वित्त सचिव सोफिया दहिया, सीआरआईडी के डिप्टी चेयरपर्सन भारतेंदु गैरोला, अतिरिक्त उपायुक्त प्रशांत पंवार, नगर निगम गुरूग्राम के संयुक्त आयुक्त प्रदीप अहलावत एवं हरीओम अत्री, निगम पार्षद आरएस राठी, सीमा पाहुजा, कुलदीप यादव, विरेन्द्रराज यादव, महेश दायमा, अनूप सिंह, हेमन्त सेन एवं योगेन्द्र सारवान, वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल यादव एवं मंगतराम बागड़ी सहित विभिन्न आरडब्ल्यूए के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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