भगवान श्री कृष्ण द्वारा किया गया महारास आत्माओं का परमात्मा से मिलन था:अनिरुद्धाचार्य महाराज

 वृन्दावन। टीम अजेयभारत। कुम्भ मेला स्थित ब्राह्मण सेवा संघ शिविर में श्री मद्भागवत सप्ताह के अंतर्गत भागवत के सरस प्रवक्ता अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि शरद पूर्णिमा के अवसर पर यमुना किनारे वंशीवट पर मध्य रात्रि में भगवान श्री कृष्ण द्वारा किया गया महारास आत्माओं का परमात्मा से मिलन था।उन्होंने रासलीला का अपूर्व रस वर्णन करते हुए कहा कि भगवान की रासलीला का श्रद्धापूर्वक श्रवण और वर्णन करने से गोविंद के चरणार्विंदों की प्रेमाभक्ति प्राप्त होती है।



उन्होंने आगे उद्धव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा

कि गोपियों का श्री कृष्ण के प्रति प्रेम निस्वार्थ आत्मिक,अनन्य और अलौकिक था। जिसमें गोपिया श्री कृष्ण के बिना एक पल भी जीवित रहने को तैयार न थी।भगवान श्री कृष्ण ने  उद्धव को जब  गोपियों को समझाने के लिए वृन्दावन भेजा तो उसके ज्ञान की पोटली ज्ञान गुदड़ी में बिखर गयी और वे परम ज्ञानी वेदान्ती दारशनिक होने पर भी अपने को असमर्थ समझ किंकर्तव्यविमूढ़ हो श्री कृष्ण प्रेम में असक्त बापिस लौट गये।


अनिरुद्धाचार्य महाराज ने ब्यासपीठ से रुक्मणि मंगल एवं शिशुपाल वध का रोचक वर्णन करते हुए कहा कि ईश्वर से प्रेम करो या बैर परमात्मा कभी किसी का अहित नही करते।उद्धार कर देते हैं।कैसीभी स्थिति हो भगवान का स्मरण बना रहे उसी में जीव का कल्याण है।श्रीकृष्ण ने शिशुपाल द्वारा बैर रखने पर उसका अंत कर परमधाम भेज दिया।

और प्रेमाभक्ति वश रुक्मणि से विवाह किया।

कथा से पूर्व ब्राह्मण सेवा संघ के अध्यक्ष आचार्य आनन्द वल्लभ गोस्वामी, संस्थापक चन्द्रलाल लाल शर्मा, संयोजक सत्यभान शर्मा, कार्ष्णि नागेंद्र महाराज ने व्यासपीठ का पूजन अर्चन किया।

इस अवसर पर

भारत यादव, ओम प्रकाश शास्त्री, अशोक अज्ञ,पं जगदीश नीलम,आनंद द्विवेदी,आदि उपस्थित थे।

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